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एक बार फिर पाकिस्तान ने अलापा कश्मीर का राग, ट्रंप ने जताई मदद की इच्छा

पाकिस्तान जो की हमारा पड़ोसी मुल्क है लेकिन हम ये भी अच्छे से जानते हैं कि पड़ोसी मुल्क होने के बावजूद भारत से इसके संबंध कुछ अच्छे नहीं है और इसकी वजह खुद पाकिस्तान ही है। हमेशा अन्य देशों से मदद लेने वाले पाकिस्तान की आज ऐसी नौबत आ गई है कि कोई उसके साथ हांथ नहीं मिलाना चाहता है। पूरा विश्व जान चुका है कि पाक आतंकवादियों को पनाह देता है। लेकिन आज जो खबर सामने आई है उसे सुनकर हर कोई हैरान है।

दरअसल आपको बता दें कि एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से कश्मीर पर मदद करने की इच्छा जाहिर की है। इस खबर को सुनने के बाद सभी हैरान है कि आखिर अमेरीका पाकिस्तान की कैसे मदद करेगा, इस बात को लेकर स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक से इतर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात के दौरान यह इच्छा प्रकट की।

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वहीं यह भी बताते चलें कि ट्रंप ने मुलाकात के बाद मीडिया कर्मियों से कहा, हमने कश्मीर सहित कई मसले पर चर्चा की। जिसमें उन्होने कहा कि हम भारत-पाकिस्तान को लेकर कश्मीर मसले पर विचार कर रहे हैं। यदि हम इसमें मदद कर सके, तो जरूर करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले भी कश्मीर पर मध्यस्थता करने की मंशा जाहिर की थी। हालांकि भारत ने उसे सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मसला है और इस पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।

पहली बार भारत आएंगे अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रंप, होंगे कई सारे फायदे

इस मुलाकात को लेकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से उनके भारत और पाकिस्तान के दौरे को लेकर पूछा गया तो उन्होने कहा कि अभी तो हम पाकिस्तान पीएम के साथ हैं, इसलिए हमें वास्तव में अभी तो ऐसा कुछ नहीं करना पड़ेगा। हालांकि एक अलग दृष्टिकोण से देखें तो मैं दोनों ही देशों को ‘हैलो’ कहना चाहता था क्योंकि इन दोनों ही देशों के साथ हमारे काफी पुराने और गहरे संबंध हैं।

ट्रंप पहले भी कर चुके हैं कश्मीर का जिक्र

वैसे अगर आपको याद होगा तो पिछले साल ही सितंबर में अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि पाकिस्तान और भारत के बीच दशकों से चले आ रहे कश्मीर मुद्दे पर हमने बात की है और जो भी मदद हम कर सकते हें उसके लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं उन्होने यह भी कहा था कि वह इस मुद्दे पर मदद की पेशकश और मध्यस्थता के लिए दोनों देशों से लगातार संपर्क में हैं। अमेरिका बारीकी इस पर नजर बनाए हुए है।

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